Daily Current Affairs

Awards


ANUPAM KHER TO RECEIVE IIFA LIFETIME ACHIEVEMENT AWARD 2018

Veteran actor Anupam Kher will be given the prestigious Lifetime Achievement honour at the upcoming International Indian Film Academy (IIFA) awards ceremony in Bangkok. The 63-year-old actor is a recipient of two National Film Awards and eight Filmfare Awards. He has held the post of chairman of the Central Board of Film Certification and the National School of Drama in India. Kher, who has worked in over 500 films spanning across languages along with projects both in India and abroad for over three decades, will be honoured for his contribution in the field of cinema.


पुरस्कार


अनुपम खेर को आईफा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2018 से सम्‍मानित किया जाएगा

फिल्मों में अपनी एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीतने वाले दिग्गज कलाकार अनुपम खेर को 19वें अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म एकेडमी की ओर से आइफा अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। 63 साल के इस एक्टर को यह सम्मान 500 से ज्यादा भारतीय और विदेशी फिल्मों में काम करने के लिए दिया जाएगा। गौरतलब है कि अनुपम खेर को सिनेमा के क्षेत्र में करीब 34 साल हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कई भारतीय और विदेशी फिल्मों में काम किया है।

वहीं IIFA जैसा बड़ा सम्मान मिलने पर अनुपम खेर ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा- ‘ सिनेमा में मेरी उपलब्धियों को स्वीकारने के लिए मैं IIFA का धन्यवाद करता हूं। मुझे इस बात की खुशी है कि फिल्म इंडस्ट्री से मुझे यह अवॉर्ड लेने के मौका मिला है।’ आपको बता दें कि अनुपम खेर ने बॉलीवुड में कई शानदार फिल्में की हैं।


Books


BHAGAT SINGH’S JAIL DIARY:RAJSHEKHAR VYAS

Union Minister of IT and Law Ravi Shakar Prasad has released Bhagat Singh’s jail diary book at a function in New Delhi. The jail diary book is a compilation of Bhagat Singh’s writings. Bhagat Singh had written (own handwriting) the diary during September 12, 1929, to March 22, 1931. After the martyrdom of Bhagat Singh (March 23, 1931) the diary was handed over to Kultar Singh. This probably is the first authentic and most detailed reproduction of Shaheed-e-Aazam’s diary notes written in his own handwriting.


पुस्तकें


भगत सिंह की जेल डायरी :राजशेखर व्यास

केंद्रीय आई.टी और कानून मंत्री रवि शकर प्रसाद ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में भगत सिंह की जेल डायरी पुस्तक का विमोचन किया। जेल डायरी पुस्तक भगत सिंह के लेखों का संकलन है। भगत सिंह ने 12 सितंबर, 1929 से 22 मार्च 1931 तक डायरी (स्व हस्तलिखित) लिखी थी। भगत सिंह के शहीद होने के बाद (23 मार्च, 1931) डायरी कुलतार सिंह को सौंप दी गई थी। यह शायद शहीद-ए-आज़म द्वारा स्वयं के हस्तलेख में लिखे डायरी नोटों की पहली प्रामाणिक और सबसे विस्तृत प्रतिकृति है।


International


INDIA MOVES UP TO 137TH RANK ON 2018 GLOBAL PEACE INDEX

India has moved up four places to the 137th rank among 163 countries on the 2017 Global Peace Index, due to a reduction in the level of violent crime driven by increased law enforcement, according to a report by an Australian think tank. Iceland remains the most peaceful country in the world, a position it has held since 2008. New Zealand, Austria, Portugal and Denmark also sit in the top five most peaceful rankings. Syria remains the least peaceful country in the world, a position it has held for the past five years. Afghanistan, South Sudan, Iraq and Somalia comprise the remaining least peaceful countries. The index is topped by Iceland, followed by New Zealand, Portugal, Austria and Denmark, whereas war-torn Syria remains the least peaceful country in the world, followed by Afghanistan, Iraq, South Sudan, and Yemen.

India has improved by four positions in the overall ranking from 141st to 137th.

India was also among the countries with the biggest decreases in the number of deaths, along with Sri Lanka, Chad, Colombia, and Uganda. The report provides a comprehensive analysis on the state of world peace. It said that amid continuing social and political turmoil, the world continues to spend enormous resources on creating and containing violence but very little on peace.

The countries that displayed the most significant growth in heavy weapons capabilities over the last 30 years are primarily in unstable regions where there are high tensions with neighbouring countries. These include Egypt, India, Iran, Pakistan, South Korea, and Syria. The greatest increase in the number of deaths occurred in Syria, followed by Mexico, Afghanistan, Iraq, and Yemen. The results of the 2017 Global Peace Index (GPI) show that the global level of peace has deteriorated by 0.27 per cent in the last year, marking the fourth successive year of deteriorations. Ninety-two countries deteriorated, while 71 countries improved.


अन्तराष्ट्रीय


भारत वैश्विक शांति सूचकांक 2018 में 137वें स्थान पर

ऑस्ट्रेलियाई विचार मंच ‘इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी)’ द्वारा जारी वैश्विक शांति सूचकांक 2017 में भारत 163 देशों में 137वें पायदान पर है. हालांकि, उसकी स्थिति में चार बीते वर्ष की अपेक्षा चार स्थान का सुधार हुआ है. 2016 में इसी सूचकांक में भारत 141वें पायदान पर था. सुधार की स्थिति इस दौरान हिंसक अपराध के स्तर में कमी के चलते आई है. सूचकांक के अनुसार, आइसलैंड विश्व का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है. आइसलैंड इस स्थान पर 2008 से ही काबिज है. इसके साथ ही पांच सबसे शांतिपूर्ण रैंकिंग वाले देशों में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल और डेनमार्क शामिल हैं.सीरिया विश्व का सबसे कम शांति वाला देश है, वह इस स्थान पर पिछले पांच वर्षों से कायम है. अफगानिस्तान, दक्षिण सूडान, इराक और सोमालिया अन्य सबसे कम शांति वाले देशों में शामिल हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पीस ने कहा, ‘भारत की रैंकिंग में चार स्थानों का सुधार मोटे तौर पर कानून प्रवर्तन बढ़ने से हिंसक अपराध के स्तर में आई कमी के चलते हुआ है. इस बीच, कश्मीर में 2016 के मध्य में अशांति बढ़ने से भारत और उसके पड़ौसी पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था, बाहरी संघर्ष से दोनों देशों में मृतक संख्या बढ़ गई थी.’ संस्थान ने कहा कि ऐसे देश जिन्होंने पिछले 30 वर्षों में भारी हथियारों की क्षमता में सबसे अधिक वृद्धि प्रदर्शित की वे मुख्य रूप से अस्थिर क्षेत्रों में हैं. यहां पड़ोसी देशों के साथ बहुत अधिक तनाव है. इनमें मिस्र, भारत, ईरान, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और सीरिया शामिल हैं. 2017 वैश्विक शांति सूचकांक का परिणाम दिखाता है कि पिछले वर्ष शांति का वैश्विक स्तर 0.27 प्रतिशत खराब हुआ है. 92 देशों में यह खराब हुआ जबकि 71 देशों में इसमें सुधार हुआ.


National


INDIA RECORDS 22% REDUCTION IN MATERNAL MORTALITY RATIO SINCE 2013

India has registered a 22% reduction in maternal mortality ratio (MMR) since 2013, according to the Sample Registration System (SRS) Bulletin (2016) released. Amongst the states, Uttar Pradesh with 30% decline has topped the chart in the reduction of maternal deaths. Nearly 1,000 fewer women now die of pregnancy related complications each month in India, the bulletin said.

According to the bulletin, MMR of India has declined from 167 in 2011-2013 to 130 in 2014-2016. The decline has been most significant in empowered action group (EAG) states and Assam from 246 to 188. Among the southern states, the decline has been from 93 to 77 and in the other states from 115 to 93.

According to the SRS Bulletin, there were nearly 12,000 fewer maternal deaths in 2016 as compared to 2013, with total number of maternal deaths for the first time reducing to 32,000. This means that every day 30 more pregnant women are now being saved in India as compared to 2013. Three states have already met the sustainable development goals target for MMR of 70 per 100,000. These are Kerala, Maharashtra and Tamil Nadu, while Andhra Pradesh and Telangana are within striking distance. 


राष्ट्रिय


भारत में वर्ष 2013 की मातृ मृत्‍यु दर में 22% की कमी दर्ज की गई

भारत में वर्ष 2013 से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) रिकार्ड 22 प्रतिशत की महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी बुधवार को जारी ‘ सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम ’ (एसआरएस) बुलेटिन में दी गई। विशेष बुलेटिन के अनुसार , यह मृत्युदर वर्ष 2011-13 में 167 से घटकर 2014-16 में 130 हो गई। एमएमआर को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों के अनुपात के तौर पर परिभाषित किया जाता है। इसमें कहा गया है कि यह गिरावट ‘ इंपावर्ड एक्शन ग्रुप ’ (ईएजी) राज्यों (246 से घटकर 188) में सबसे महत्वपूर्ण है। मातृ मृत्यु दर पर विशेष बुलेटिन में कहा गया कि दक्षिणी राज्यों में यह 93 से घटकर 77 और ‘‘ अन्य ’’ राज्यों में 115 से घटकर 93 रह गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि एसआरएस बुलेटिन के अनुसार , 2013 की तुलना में 2016 में प्रसव के समय मां की मुत्यु के मामलों में करीब 12 हजार की कमी आई है और ऐसी स्थिति में माताओं की मृत्यु का कुल आंकड़ा पहली बार घटकर 32 हजार पर आ गया है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत में 2013 की तुलना में अब हर दिन 30 ज्यादा गर्भवती महिलाओं को बचाया जा रहा है। 

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